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गुढ़ानाथावतान (बूंदी)।
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पिछले 6 महीनों से एनक्लोजर (बड़े घेरे) में रह रहे ढाई साल के नर बाघ को अब खुले जंगल में छोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। वन विभाग की टीम ने मंगलवार को बाघ को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) करके उसके गले में लगे रेडियो कॉलर की बैटरी बदली और कॉलर को ढीला किया, क्योंकि बाघ की उम्र और वजन बढ़ने से कॉलर तंग हो गया था।
जयपुर से आई डॉक्टरों की टीम ने किया ऑपरेशन
डॉ. अरविंद माथुर (जयपुर से आए पशु चिकित्सक) ने फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट और उपवन संरक्षक अरविंद कुमार झा की मौजूदगी में कॉलर बदलने का काम पूरा किया। यह सेटेलाइट रेडियो कॉलर बाघ की निगरानी (मॉनिटरिंग) के लिए लगाया गया है, जिससे उसकी गतिविधियों पर केंद्र से भी नजर रखी जा सकेगी।
जंगल में छोड़ने की सिफारिश भेजी गई
अब बाघ को जंगल में छोड़ने की अनुमति के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को सिफारिश भेज दी गई है। अनुमति मिलते ही बाघ को जल्द ही खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
अब बना है पूरा शिकारी
यह बाघ पहले रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अपनी मां के साथ रहता था। मां की मौत के बाद दोनों शावकों को कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पाला गया। नर शावक को 4 दिसंबर 2024 को रामगढ़ लाया गया, जहां उसने अब तक 50 से ज्यादा शिकार किए हैं। मादा शावक को मुकुंदरा टाइगर रिजर्व भेजा गया था।
चिड़ियाघर में पले बाघ को बनाया गया जंगल के लायक
यह देश का पहला मामला है, जब किसी चिड़ियाघर में पले-बढ़े बाघ को जंगल में जीने के लायक बनाया गया है। इस प्रक्रिया को “रीवाइल्डिंग” कहा जाता है, जिसे रामगढ़ टाइगर रिजर्व ने सफलतापूर्वक पूरा किया है।
“बाघ अब जंगल के लिए पूरी तरह तैयार है। जैसे ही आदेश मिलेगा, उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा।”
– अरविंद कुमार झा, उपवन संरक्षक
“बाघ अब पूरी तरह जंगल के माहौल में ढल चुका है, जल्द ही उसे छोड़ दिया जाएगा।”
– सुगनाराम जाट, फील्ड डायरेक्टर
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