रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में एक टेलीविज़न साक्षात्कार में बड़ा बयान देते हुए कहा कि रूस यूक्रेन में अपने सैन्य अभियान को परमाणु हथियारों के बिना भी सफलतापूर्वक अंजाम दे सकता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनका देश अपने उद्देश्यों को पारंपरिक सैन्य ताकत के जरिए भी पूरा कर सकता है।
“परमाणु हथियार अंतिम विकल्प नहीं” – पुतिन
पुतिन ने रूस की सरकारी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, “कुछ ताकतें हमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की ओर धकेलना चाहती हैं, लेकिन हमें इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। हमारे पास पहले से ही पर्याप्त सामर्थ्य है जिससे हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं।”
अभियान का उद्देश्य: दीर्घकालिक समाधान और सुरक्षा
पुतिन ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन में चल रहे अभियान का प्रमुख मकसद संकट के मूल कारणों को खत्म करना और रूस तथा उसकी जनता की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य दीर्घकालिक और स्थायी शांति की स्थितियाँ बनाना है, जिससे भविष्य में इस तरह के संघर्षों की पुनरावृत्ति न हो।”
यूक्रेन संकट पर रूस की सोच
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस हमेशा से शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है, लेकिन किसी भी समझौते या वार्ता के दौरान रूस के वैध हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि संकट को केवल तभी हल किया जा सकता है जब रूस की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लिया जाए।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान से पहले आया इंटरव्यू
यह इंटरव्यू ऐसे समय प्रसारित हुआ है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन संकट को लेकर आगामी वार्ता का संकेत दिया है। माना जा रहा है कि पुतिन का यह बयान वैश्विक राजनीति में रूस के रुख को स्पष्ट करने की रणनीति का हिस्सा है।
यूक्रेनी ठिकानों पर रूस के हमले जारी
रूसी सेना यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है। पुतिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों के भीतर रूस ने यूक्रेन के 139 से अधिक क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। वहीं, उन्होंने अमेरिका को लेकर भी संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, “हम अमेरिकी हितों का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि रूस के साथ भी उसी प्रकार का सम्मानपूर्ण व्यवहार हो।”
निष्कर्ष
पुतिन का यह बयान संकेत देता है कि रूस अभी परमाणु विकल्प से दूर रहना चाहता है, लेकिन साथ ही वह अपने सुरक्षा हितों को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वैश्विक कूटनीति इस संकट को किस दिशा में ले जाती है।
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