नई दिल्ली: भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में सोमवार सुबह भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 8:54 बजे दर्ज किया गया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 मापी गई। झटके इतने तेज थे कि स्थानीय लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए।
पाकिस्तान तक महसूस हुए झटके
भूकंप का प्रभाव अफगानिस्तान के अलावा पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में भी देखा गया। हालांकि, अब तक किसी तरह की जनहानि या संपत्ति को नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। भूकंप के बाद राहत और बचाव एजेंसियां स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।
दिनभर कई इलाकों में कंपन
आज सुबह ही एशिया के अन्य हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। तिब्बत में 3.8, म्यांमार में 3.9 और बंगाल की खाड़ी में 4.5 तीव्रता वाले भूकंप दर्ज किए गए। इन सभी घटनाओं में अब तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं मिली है।
भूकंप क्यों आते हैं?
धरती की बाहरी परत कई टेक्टोनिक प्लेट्स में बंटी हुई है, जो निरंतर गति में रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं, तो उनके बीच संचित ऊर्जा अचानक मुक्त होती है और कंपन के रूप में सतह तक पहुंचती है। यही कंपन भूकंप कहलाते हैं।
भारत में कौन-कौन से इलाके हैं संवेदनशील?
भारत का लगभग 59 प्रतिशत भूभाग भूकंप के खतरे की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। भारत को चार जोन—जोन 2, 3, 4 और 5—में विभाजित किया गया है। इनमें जोन-5 सबसे ज्यादा जोखिम भरा है, जबकि जोन-2 में खतरा अपेक्षाकृत कम होता है। देश की राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है, जहां 7 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आ सकता है।
भूकंप की तीव्रता और प्रभाव (रिक्टर स्केल के अनुसार):
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4.0–4.9: हल्की कंपन, हल्के नुकसान की संभावना
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5.0–5.9: मध्यम झटके, भारी फर्नीचर हिल सकता है
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6.0–6.9: संरचनात्मक नुकसान संभव
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7.0–7.9: बड़ी इमारतें गिर सकती हैं
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8.0–8.9: भीषण तबाही और सुनामी की आशंका
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9.0 और उससे ऊपर: अत्यंत विनाशकारी
निष्कर्ष
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है सतर्कता और जागरूकता। अफगानिस्तान में आए इस भूकंप ने एक बार फिर दिखा दिया है कि टेक्टोनिक गतिविधियाँ सीमाएं नहीं देखतीं। आवश्यकता है कि हम आपदा प्रबंधन और सतर्कता प्रणाली को मज़बूत करें ताकि जान-माल का नुकसान न्यूनतम हो।
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