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जोधपुर में वायु प्रदूषण का असर
जोधपुर में बीते कुछ दिनों से उत्तरी हवाओं के चलते वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में थोड़ा सुधार हुआ है। बुधवार को AQI औसतन 132 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, लेकिन सतही ओजोन का स्तर 100 के पार पहुंच गया, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
सतही ओजोन के बढ़ने का कारण और नुकसान
सतही ओजोन वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं में मौजूद कार्बनिक पदार्थों की सूरज की पराबैंगनी किरणों के साथ रासायनिक क्रिया से बनती है। यह अत्यधिक सक्रिय गैस है, जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है।
- बीमारियां:
- श्वसन तंत्र की समस्याएं
- अस्थमा और ब्रोंकाइटिस
- सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज)
- लंबे समय तक खांसी
वर्तमान में जोधपुर में वायरल बुखार, खांसी और जोड़ों के दर्द जैसे लक्षण भी तेजी से फैल रहे हैं।
वायु प्रदूषण मापने के उपाय
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जोधपुर के विभिन्न स्थानों जैसे कलक्ट्रेट, मंडोर, झालामंड, डिगाड़ी कलां और चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए हैं। यह हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व जैसे पीएम 10, पीएम 2.5, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, सतही ओजोन आदि का मापन करता है।
सतही ओजोन और पार्टिकुलेट मैटर सबसे बड़े प्रदूषक
- पार्टिकुलेट मैटर: धूल, कार्बन, धुएं और धातुओं के महीन कण होते हैं।
- सतही ओजोन: यह सर्दियों में भी अधिक बन रही है, जिससे वैज्ञानिक चिंतित हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार सतही ओजोन का स्तर 8 घंटे में 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। ऐसे में सतही ओजोन का स्तर बढ़ना स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
यात्रियों और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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