इस्लामाबाद: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के शुरुआती 10 महीनों में उसे कुल 16.08 अरब डॉलर की विदेशी सहायता प्राप्त हुई है। इसमें बड़ी भूमिका चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों की रही है। ये आंकड़े पाकिस्तान के आर्थिक मामलों प्रभाग (EAD) की ओर से जारी रिपोर्ट में सामने आए हैं।
सालाना लक्ष्य के करीब पहुंचा पाकिस्तान
पाकिस्तान ने चालू वित्त वर्ष के लिए 19.2 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज और अनुदान जुटाने का लक्ष्य तय किया था, जिसमें से 30 अप्रैल 2025 तक उसे लगभग 84% रकम मिल चुकी है। बीते साल इसी अवधि में पाकिस्तान को 7.14 अरब डॉलर की सहायता मिली थी।
रिपोर्ट के अनुसार, 6.08 अरब डॉलर की प्रत्यक्ष सहायता और बाकी हिस्से में रोलओवर कर्ज, अनुदान और जमा धनराशि शामिल है। खास बात यह है कि इस आंकड़े में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से हाल में मिले 1 अरब डॉलर को शामिल नहीं किया गया है।
बड़े सहयोगी: चीन, सऊदी अरब और यूएई
तीनों प्रमुख साझेदार देशों ने मिलकर पाकिस्तान को 8 अरब डॉलर से अधिक की सहायता दी:
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सऊदी अरब: 3 अरब डॉलर (डिपॉजिट और लोन के रूप में)
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यूएई: 2 अरब डॉलर
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चीन: 3 अरब डॉलर
इसके अलावा पाकिस्तान को इन देशों से हर साल लगभग 12.7 अरब डॉलर की रोलओवर व्यवस्था भी प्राप्त होती है, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार को अस्थायी राहत देती है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का शुद्ध अंतरराष्ट्रीय भंडार (NIR) फिलहाल लगभग 3.3 अरब डॉलर के आसपास है।
अन्य स्रोतों से मिली आर्थिक मदद
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विदेशों में बसे पाकिस्तानियों से – 1.61 अरब डॉलर
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एशियाई विकास बैंक (ADB) – 1.253 अरब डॉलर
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विश्व बैंक (WB) – 1.07 अरब डॉलर
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वाणिज्यिक ऋणदाता (यूएई आधारित) – 706 मिलियन डॉलर
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड से 1 अरब डॉलर जुटाने का भी लक्ष्य रखा है, जो अभी अधूरा है।
IMF बेलआउट की देरी का असर
EAD की रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी आर्थिक सहायता में लगभग 15% की गिरावट आई है, जिसकी एक प्रमुख वजह IMF बेलआउट पैकेज में देरी रही। पिछली बार इसी अवधि में पाकिस्तान को कुल 8.2 अरब डॉलर की मदद मिली थी, जिसमें IMF की रकम शामिल थी।
कर्ज पर टिके पाकिस्तान के सपने
फिलहाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बाहरी कर्ज और डिपॉजिट पर निर्भर नजर आती है। चीन और खाड़ी देशों के साथ-साथ प्रवासी पाकिस्तानियों की मदद पर टिके इस तंत्र ने अल्पकालिक राहत तो दी है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान अभी भी दूर की बात लगता है।
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