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मध्यप्रदेश के सतना जिले में शस्त्र लाइसेंस से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी किए गए, जो कि सिर्फ जिले के निवासियों को मिल सकते थे, लेकिन ये लाइसेंस दूसरे राज्यों के लोगों को भी दिए गए। कारतूसों के वितरण में भी गड़बड़ी की गई थी। इस घोटाले में अब प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, और जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
एसटीएफ की जांच
एसटीएफ (विशेष कार्य बल) द्वारा इस घोटाले की जांच की जा रही है। मामले में पहले अपराध धारा 420, 34 भादवि, और आयुध अधिनियम 1959 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब जांच में धारा 466 और 477A (कपटपूर्वक दस्तावेज तैयार करने) भी जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
कलेक्टर से मांगी जानकारी
एसटीएफ ने कलेक्टर से तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर विनय जैन और शस्त्र शाखा के लिपिक अभयराज सिंह के बारे में जानकारी मांगी है। जानकारी में यह पूछा गया है कि विनय जैन अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं या नहीं, उनकी सेवानिवृत्ति कब और कहां हुई, और उनका वेतनमान क्या था। इसके साथ ही अभयराज सिंह के सेवानिवृत्त होने से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।
अभी तक नहीं मिली आवश्यक जानकारी
एसटीएफ ने यह भी बताया कि शस्त्र लाइसेंस के फर्जीवाड़े से जुड़े अभिलेख, जिनमें 2003 के दौरान के दस्तावेज शामिल हैं, अभी तक सतना से नहीं मिले हैं। इसे दोषियों को बचाने की कोशिश माना जा सकता है।
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