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राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। खेतड़ी पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए एक युवक पप्पू मीणा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पप्पू की मौत से पहले पुलिस ने उसके परिवार से दो लाख रुपए की मांग की थी, और इस मामले में अब हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस ने पैसे की मांग की, फिर भी नहीं छोड़ा युवक
घटना के अनुसार, पप्पू मीणा को 6 अप्रैल को पुलिस ने हिरासत में लिया। उसी दिन खेतड़ी पुलिस के सिपाही भरत और हेड कांस्टेबल दिनेश गुर्जर ने पप्पू के परिवार से दो लाख रुपए की मांग की। 8 अप्रैल को जब परिवार ने पैसे दिए, तब पुलिस ने कहा कि अब पप्पू और दीपक को छोड़ दिया जाएगा। लेकिन, 14 अप्रैल को अचानक पुलिस ने फोन कर बताया कि पप्पू की मौत हो गई है। शव में गंभीर चोटों के निशान थे, जिसे देख कर परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पिटाई कर उसकी हत्या की।
गहने गिरवी रखे, फिर भी नहीं मिली राहत
पप्पू के परिजनों ने आरोप लगाया कि दीपक की पत्नी ने पुलिस को दो लाख रुपए देने के लिए गहने तक गिरवी रख दिए थे। इसके बावजूद, युवक की मौत हो गई। पप्पू के पिता ने भी ब्याज पर रुपए लेकर कांस्टेबल दिनेश को दिए थे, लेकिन फिर भी पप्पू की जान नहीं बचाई जा सकी।
आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा
पप्पू मीणा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस उपाधीक्षक और थानाधिकारी सहित आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। खेतड़ी थाने के बाहर धरना भी दिया गया था, जो प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच सहमति बनने के बाद समाप्त हुआ।
मुआवजा और नौकरी की घोषणा
मृतक पप्पू के परिवार को मुआवजा देने की घोषणा की गई है। उन्हें एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत 8.25 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त 5 लाख रुपए का मुआवजा भी प्रदान किया जाएगा। पप्पू की पत्नी को प्रतिमाह 7,000 रुपए पेंशन दी जाएगी, और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी।
यह घटना पुलिस कार्रवाई और सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है, और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
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