तेल अवीव: इजराइल की सुरक्षा प्रणाली, खासकर आयरन डोम, को दुनिया की सबसे मजबूत रक्षा कवचों में गिना जाता है। लेकिन अब इसी “अभेद्य” सुरक्षा तंत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को चौंका दिया है। जानकारी के अनुसार, ईरानी एजेंटों ने इजराइल के एक 13 वर्षीय बच्चे को टेलीग्राम ऐप के जरिए जाल में फंसाकर जासूसी कराने की कोशिश की।
कैसे हुआ खुलासा?
तेल अवीव में रहने वाला यह किशोर शुरुआत में एक मामूली काम के लिए ईरानी एजेंट के संपर्क में आया। एजेंट ने उसे बस स्टॉप्स और दीवारों पर ग्राफिटी बनाने के लिए पैसे का लालच दिया। इस काम के लिए उसे भुगतान भी किया गया। लेकिन धीरे-धीरे काम की प्रकृति बदलने लगी और मामला गंभीर होता गया।
क्या-क्या करवाने की कोशिश की गई?
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एजेंट ने लड़के से इजराइल के सुरक्षा और परमाणु ठिकानों से जुड़ी जानकारी जुटाने को कहा।
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उससे विदेश मंत्री गिदोन सार के घर की तस्वीरें भेजने को कहा गया, जो उसने इंटरनेट से खोजकर भेज दीं।
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इसके बदले में उसे क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान मिला।
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बाद में एजेंट ने आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम की तस्वीरें लेने को भी कहा, लेकिन यह काम उसने नहीं किया।
बच्चा कैसे बच पाया?
जब एजेंट के निर्देश और दबाव बढ़ने लगे, तो किशोर को संदेह हुआ। उसने बातचीत बंद करते हुए टेलीग्राम पर उस एजेंट को ब्लॉक कर दिया। इजराइली पुलिस ने बताया कि बच्चा पूरी तरह अनजान था कि वह एक विदेशी खुफिया एजेंसी के संपर्क में है और उसका कोई देशद्रोही इरादा नहीं था।
बच्चे के वकील ने बताया कि जैसे ही उसे स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा हुआ, उसने फौरन संपर्क तोड़ लिया। फिलहाल उसे घर में नजरबंद रखा गया है, और उसके माता-पिता को पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही पूरी जानकारी मिल पाई।
ईरान की रणनीति में बच्चों का इस्तेमाल?
यह मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं है। हाल ही में इजराइल में एक 16 साल के किशोर को संवेदनशील जगहों की तस्वीरें लेते और भड़काऊ पर्चे बांटते हुए पकड़ा गया। इससे पहले 18 वर्षीय युवक को पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की अस्पताल में निगरानी करते हुए गिरफ्तार किया गया था – उसका संपर्क भी टेलीग्राम पर ईरानी एजेंट से हुआ था।
इन घटनाओं से साफ है कि ईरानी खुफिया एजेंसियां अब कम उम्र के युवाओं को निशाना बना रही हैं, जो सोशल मीडिया के ज़रिए आसानी से उनके संपर्क में आ जाते हैं।
क्या आयरन डोम वाकई सुरक्षित है?
इजराइल की Iron Dome प्रणाली ने दशकों तक मिसाइल हमलों को नाकाम किया है, लेकिन यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल युद्ध के दौर में कमजोर कड़ी कहीं से भी निकल सकती है — भले वह एक मासूम किशोर ही क्यों न हो।
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