संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क:
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मंच से स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा न केवल उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी बेहद अहम मुद्दे हैं। भारत के इस सशक्त रुख के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके विरोधी देशों की बेचैनी भी साफ नजर आ रही है।
भारत की खुली चेतावनी: समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर कोई समझौता नहीं
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक उच्चस्तरीय खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने स्पष्ट किया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरते खतरों के मद्देनज़र भारत अपनी रणनीति को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा,
“हमारी समुद्री सीमाएं लंबी हैं, हमारे पास मजबूत नौसेना है, और इसी वजह से भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में वैश्विक नियमों और सुरक्षा के पक्ष में खड़ा है।”
भारत की समुद्री रणनीति: सुरक्षा, सहयोग और संरचना का समन्वय
राजदूत हरीश ने बताया कि भारत की नीति रक्षा क्षमताओं, कूटनीतिक प्रयासों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, और आंतरिक ढांचागत विकास के चार स्तंभों पर टिकी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत एक ऐसी व्यवस्था का समर्थन करता है जो नियम-आधारित, खुली और स्वतंत्र हो। भारत का यह रुख UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) के सिद्धांतों पर आधारित है।
आतंकवाद और समुद्री डकैती को बताया वैश्विक संकट
इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी समुद्री चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा,
“समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद और संगठित अपराध जैसी गतिविधियाँ वैश्विक शांति, व्यापार और स्थायित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए।
भारत ने दिखाई वैश्विक नेतृत्व की झलक
भारत के इस स्पष्ट और आक्रामक रुख ने यह दिखा दिया है कि वह न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि वह वैश्विक मंच पर एक निर्णायक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है। समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट करने वाला कदम माना जा रहा है।
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