लखनऊ:
उत्तर प्रदेश की जनता को बिजली बिल के रूप में बड़ा झटका लगने वाला है। बीजेपी सरकार ने चुनाव से पहले गरीबों को ₹3 प्रति यूनिट बिजली देने का वादा किया था, लेकिन अब नया बिजली दर प्रस्ताव दिखा रहा है कि उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक की खपत पर ₹13 प्रति यूनिट तक देना पड़ सकता है।
क्या है नया प्रस्ताव?
यूपी पावर कॉर्पोरेशन ने राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) को जो नया प्रस्ताव भेजा है, उसके अनुसार:
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शहरी उपभोक्ता को 100 यूनिट पर ₹1459 तक
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ग्रामीण उपभोक्ता को ₹1417 तक का बिल भरना पड़ सकता है
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पहले यह बिल लगभग आधा होता था
फिक्स चार्ज में बढ़ोतरी
अब फिक्स चार्ज भी बढ़ाने की तैयारी है:
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शहरी क्षेत्रों में ₹110 से बढ़ाकर ₹190 प्रति किलोवाट
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ग्रामीण क्षेत्रों में ₹90 से बढ़ाकर ₹150 प्रति किलोवाट
इससे उन उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा, जो कम बिजली इस्तेमाल करते हैं।
उपभोक्ताओं पर डाली जा रही ज्यादा जिम्मेदारी
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस प्रस्ताव को गलत और उपभोक्ताओं के साथ धोखा बताया। उन्होंने कहा कि:
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पावर कॉर्पोरेशन जानबूझकर स्लैब सिस्टम और फिक्स चार्ज बदलकर कम खपत वालों से ज्यादा वसूली कर रहा है।
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जबकि कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का ₹33,122 करोड़ सरप्लस फंड है, उसे रियायत के रूप में लौटाना चाहिए।
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अब चार की जगह सिर्फ तीन स्लैब किए जा रहे हैं, जिससे दरें और बढ़ जाएंगी। कुछ स्लैब में तो 50% तक बढ़ोतरी की गई है।
वादा तो गरीबों से किया गया था… पर मार भी उन्हीं पर
सरकार ने गरीबों और सीमित खपत वाले लोगों से सस्ती बिजली देने का वादा किया था। लेकिन अब वही लोग, जो महीने में 80 से 100 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं, उन्हें करीब ₹700-₹750 ज्यादा बिल देना पड़ सकता है। पहले इनका बिल करीब ₹750 था, जो अब दोगुना हो सकता है।
अब सवाल उठता है…
क्या सरकार अपने चुनावी वादे पर टिकेगी या बिजली कंपनियों के दबाव में जनता को महंगी बिजली की मार झेलनी पड़ेगी? ये सिर्फ रेट की बात नहीं, ये भरोसे, नीति और जवाबदेही का सवाल है।
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