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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी शुरू होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच एक नाम चर्चा में है—मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार। अब तक राजनीति से दूर रहने वाले निशांत को लेकर कयास तब शुरू हुए जब नालंदा से जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने उन्हें इस्लामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी।
2020 में RJD ने जीती थी इस्लामपुर सीट
इस्लामपुर विधानसभा सीट नालंदा जिले की अहम सीट मानी जाती है। 2020 में यहां से RJD के राकेश कुमार रौशन ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने JDU के उम्मीदवार को हराया था। उस चुनाव में तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी थी, जिसका असर इस्लामपुर में भी दिखा।
2015 में JDU ने हासिल की थी जीत
2015 में JDU के चंद्रसेन प्रसाद ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। उस समय JDU, RJD और कांग्रेस महागठबंधन में थे। नीतीश कुमार के गृह जिले की यह सीट तब से JDU के लिए खास मानी जाती रही है।
जातीय समीकरण का भी बड़ा असर
इस्लामपुर में यादव और मुस्लिम वोटर संख्या में ज्यादा हैं और अक्सर RJD को समर्थन देते हैं। वहीं, कुर्मी, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) JDU के साथ माने जाते हैं। नीतीश कुमार खुद कुर्मी समुदाय से आते हैं और उनके विकास कार्यों के चलते इस वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है।
क्या हाईप्रोफाइल सीट बन जाएगा इस्लामपुर?
अगर निशांत कुमार इस्लामपुर से चुनाव लड़ते हैं, तो यह सीट बेहद हाईप्रोफाइल बन जाएगी। JDU के लिए यह एक बड़ा प्रचार मौका होगा, वहीं RJD के लिए अपनी सीट बचाना चुनौती बन सकता है। निशांत की सादगी, साफ छवि और नीतीश कुमार के बेटे होने की वजह से उन्हें वोटरों के बीच एक भरोसेमंद चेहरा माना जा सकता है।
अब देखना यह होगा कि क्या निशांत वाकई चुनावी मैदान में उतरते हैं या फिर यह चर्चा सिर्फ सियासी हवा बनकर रह जाएगी।
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