लंदन:
ब्रिटेन में गर्मियों के दौरान तापमान जैसे-जैसे बढ़ रहा है, रेलवे नेटवर्क पर उसका असर भी दिखने लगा है। इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के कई हिस्सों में ट्रेन सेवाएं रद्द की जा रही हैं या देरी से चल रही हैं। सवाल यह है कि जब अन्य देशों में 40°C या उससे अधिक तापमान पर भी रेल सेवाएं सामान्य रहती हैं, तो ब्रिटेन में सिर्फ 30-32°C पर क्यों ट्रैक उखड़ने लगते हैं?
रेलवे ट्रैक क्यों उखड़ते हैं?
ब्रिटेन के रेलवे नेटवर्क का प्रबंधन करने वाली संस्था Network Rail के अनुसार:
“रेल की पटरियां स्टील की बनी होती हैं और गर्मी में फैलती हैं। जब तापमान अत्यधिक बढ़ता है, तो ये पटरियां झुकने या मुड़ने लगती हैं। इसे ‘बकलिंग’ कहा जाता है।”
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गर्मियों में, सीधे धूप में पड़े रेलवे ट्रैक का तापमान वास्तविक वायु तापमान से 20 डिग्री अधिक हो सकता है।
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उदाहरण के तौर पर, अगर बाहर का तापमान 32°C है, तो पटरियों का तापमान 52°C तक पहुंच सकता है।
सुरक्षा के लिए लगते हैं स्पीड प्रतिबंध
जब ट्रैक के अत्यधिक फैलने का अंदेशा होता है, तो ट्रेन की गति कम कर दी जाती है।
धीमी गति से ट्रेनों के गुजरने से ट्रैक पर कम दबाव पड़ता है, जिससे बकलिंग की आशंका घट जाती है।
लेकिन यदि बकलिंग फिर भी हो जाए, तो उस सेक्शन को तुरंत बंद कर दिया जाता है। मरम्मत के बाद ही ट्रेनों की आवाजाही फिर से शुरू होती है, जिससे ट्रेनें रद्द या विलंबित होती हैं।
40°C अब नई सामान्यता?
ब्रिटेन की मौसम सेवा Met Office ने हाल ही में चेतावनी दी है:
“अब ब्रिटेन में 40 डिग्री तापमान की संभावना 1960 के दशक की तुलना में 20 गुना अधिक हो गई है।”
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Met Office की स्टडी के अनुसार, अगले 12 वर्षों में फिर से 40°C तापमान देखने की संभावना 50-50 है।
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अध्ययन की प्रमुख लेखिका डॉ. गिलियन के ने कहा:
“जलवायु लगातार गर्म हो रही है और भविष्य में इससे भी ज्यादा गर्मी देखने को मिल सकती है।”
अन्य देश क्यों झेल लेते हैं इतनी गर्मी?
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भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूएई जैसे देशों में रेलवे ट्रैक को गर्मी के अनुकूल डिजाइन किया जाता है।
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ट्रैक को विस्तार की पूर्व गणना के साथ बिछाया जाता है, ताकि गर्मियों में उनका फैलाव नियंत्रण में रहे।
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जबकि ब्रिटेन की रेल संरचना का अधिकतर हिस्सा ठंडे मौसम के अनुसार बनाया गया है। इसलिए जब अचानक तापमान बढ़ता है, तो ट्रैक उस दबाव को सहन नहीं कर पाते।
क्या किया जा रहा है?
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Network Rail रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम से तापमान और फैलाव पर नजर रखता है।
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स्पेशल हीट-रेसिस्टेंट ट्रैक और बिछाने की तकनीक पर काम हो रहा है।
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लेकिन पूरे नेटवर्क को अपग्रेड करना खर्चीला और समय लेने वाला है।
निष्कर्ष:
ब्रिटेन को अब अपनी रेल संरचना को बदलती जलवायु के अनुरूप रीडिज़ाइन करने की ज़रूरत है।
अन्यथा, हर साल की गर्मी में ट्रेन सेवाओं की रफ्तार रुकती रहेगी, और यात्रियों को बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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