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पाली (राजस्थान)।
पाली जिले में स्थित 100 साल पुराना हेमावास बांध एक बार फिर खतरे की जद में आ गया है। बांध की पाळ (किनारे) के नीचे से पानी का रिसाव शुरू हो गया है, जिससे आसपास के कई गांवों में डर का माहौल है।
🔍 रिसाव कैसे शुरू हुआ?
सुबह ग्रामीणों ने देखा कि कच्चे रास्ते से होकर पानी खेतों की ओर बह रहा है। उन्होंने तुरंत सिंचाई विभाग को सूचना दी।
अधिकारियों ने मिट्टी और पत्थर डालकर रिसाव रोकने की कोशिश की। लेकिन झाड़ियों के बीच से भी रिसाव निकलता दिखाई दिया।
📏 पानी मापने के लिए बनाया गया कॉपर डेम
पानी की मात्रा और मिट्टी के बहाव को समझने के लिए अधिकारियों ने मिट्टी के कट्टों से एक छोटी तलाई (कॉपर डेम) बनाई, ताकि रिसाव कितना गंभीर है, इसका पता लगाया जा सके।
🚨 क्या बांध को खतरा है?
सिंचाई विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि पानी के साथ मिट्टी नहीं बह रही, जिससे बांध को अभी कोई बड़ा खतरा नहीं है।
फिल्टर से पानी निकलना सामान्य प्रक्रिया है, जो पहले से बनी संरचना का हिस्सा है।
🕰️ पहले भी हो चुका है रिसाव
साल 2007 में भी इसी जगह पर बांध में रिसाव हुआ था, तब भी मिट्टी के कट्टे डालकर स्थिति संभाली गई थी।
उस समय रिसाव पाळ के बीच में था, लेकिन इस बार ये नीचे की तरफ है।
🏘️ किन गांवों पर है खतरा?
अगर रिसाव बढ़ा या बांध कमजोर हुआ, तो मंडिया, मंडली, गिरादड़ा, रूपावास, मूलियावास, जवड़िया, सुकरलाई जैसे गांव प्रभावित हो सकते हैं।
जबकि रामासिया, हेमावास और गुड़लाई जैसे ऊंचाई वाले गांवों को फिलहाल खतरा नहीं है।
📢 ग्रामीणों ने पहले ही चेताया था
ग्रामीणों का कहना है कि पानी भरने से पहले ही अधिकारियों को पाळ की मरम्मत के लिए कहा गया था, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।
अब जब बांध लगातार तीसरे साल ओवरफ्लो हो रहा है, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।
सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर ने वीडियो कॉल से बांध की स्थिति देखी है।
✔️ फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
अभी के लिए रिसाव काबू में बताया जा रहा है, लेकिन बारिश और पानी का दबाव बढ़ने से खतरा बढ़ सकता है।
प्रशासन सतर्क है और लगातार निगरानी कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों की चिंता बरकरार है।
➡️ हेमावास बांध पर नजर रखना जरूरी है, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।
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