सिडनी:
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की कंपनियां अब साइबर हमलों से पहले की तुलना में कहीं तेज़ी से रिकवर कर रही हैं। एक नए सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि जहां पहले कंपनियों को ऐसे हमलों से उबरने में औसतन 45 दिन लगते थे, अब यह अवधि घटकर 28 दिन रह गई है।
यह प्रगति तब देखने को मिली है जब 2022 में ऑप्टस और मेडिबैंक पर हुए बड़े साइबर हमलों के बाद ऑस्ट्रेलिया सरकार ने अनिवार्य साइबर सुरक्षा रिपोर्टिंग और डेटा उल्लंघन के तत्काल खुलासे जैसे कड़े नियम लागू किए।
अंतरराष्ट्रीय औसत से अब भी पीछे
हालांकि, यह सुधार स्वागत योग्य है, फिर भी ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड का औसत वैश्विक औसत 24 दिनों से थोड़ा पीछे है।
इस अध्ययन को अमेरिका की डेटा सुरक्षा कंपनी कॉमवॉल्ट ने कराया, जिसके एशिया-प्रशांत उपाध्यक्ष मार्टिन क्रेगन ने कहा:
“कंपनियों में अब जागरूकता बढ़ी है। साथ ही, सरकारी एजेंसियां अब अधिक सख्त और स्पष्ट हैं कि उन्हें कंपनियों से क्या उम्मीद है।”
कड़े नियमों का असर
2022 में हुए ऑप्टस और मेडिबैंक के साइबर हमलों में करोड़ों ग्राहकों के डेटा लीक हो गए थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कंपनियों को डेटा ब्रीच की सूचना देना अनिवार्य बना दिया।
इसके साथ ही साइबर सुरक्षा अनुपालन पर विवरणी (compliance reporting) भी जरूरी कर दी गई।
ऑस्ट्रेलिया की साइबर क्राइम एजेंसी के मुताबिक, जून 2024 तक बीते साल में प्रति कंपनी साइबर अपराध की औसत लागत 8% घटी, जिसमें बड़े उद्यमों के लिए यह गिरावट 11% तक रही।
लेकिन खतरे अभी भी कायम
कॉमवॉल्ट के 408 आईटी अधिकारियों पर आधारित इस सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि:
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30% से कम कंपनियां ही साइबर हमले के समय प्रभावी प्रतिक्रिया दे पाने में सक्षम थीं।
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12% कंपनियों के पास कोई औपचारिक प्रतिक्रिया योजना (incident response plan) नहीं थी।
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50% से अधिक संस्थाएं यह स्पष्ट नहीं कर सकीं कि उनका सारा डेटा कहां संग्रहित है और उनके सिस्टम कैसे आपस में जुड़े हैं।
साइबर सुरक्षा अब बोर्डरूम का विषय
मार्टिन क्रेगन के मुताबिक,
“अब साइबर सुरक्षा सिर्फ आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं रही। कंपनियों के बोर्ड भी यह समझने के लिए बैठकें कर रहे हैं कि उनका साइबर लचीलापन (resilience) किस स्तर पर है।”
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